नाम तो सभी सुने-सुनाये है. लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है की इन संक्षिप्त नामों के पीछे कहानी क्या है. MRF टायर से लेकर MDH मसाले तक का नाम आखिर इतना Short होने की वजह किया है. आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे की इन छोटे नामों के पीछे की असली वजह और कहानी के बारे में.
छोटे नामों के पीछे की असली कहानी
1. MDH
MDH के हर विज्ञापन में मौजूद महाशय धर्मपाल गुलाटी इसके संस्थापक है. अविभाजित भारत के सियालकोट में उनके पिता चुन्नीलाल “महाशिया दी हट्टी” नाम से मसालों का क्यापार करते थे. विभाजन के बाद धर्मपाल दिल्ली आ गए. कुछ समय बाद उन्होंने लकड़ी का बक्सा (हट्टी) खरीदा और उसी नाम से अपने पारिवारिक व्यापार की नई नींव रखी.
2. ITC
24 अगस्त 1910 में इम्पीरियल टोबैको कम्पनी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड के नाम से ITC की शुरुआत हुयी. शुरुआत के 6 दशक तक कम्पनी का व्यापार तम्बाकू पर केन्द्रित रहा. 1970 में नाम बदलकर इंडिया टौबेको कम्पनी और 1974 में I.T.C लिमिटेड कर दिया गया. 2001 में नाम के बीच से बिन्दुओं को हटाकर केवल ITC लिमिटेड कर दिया गया.
3. TVS
संस्थापक टीवी सुन्दरम आयंगर के नाम पर कम्पनी का नामकरण TVC किया गया था. वर्ष 1911 में दिल्ली में उन्होंजे टीवी सुन्दरम आयंगर एंड संस के नाम से बस सेवा शुरू की थी. 1955 में उनके देहांत के बाद उनके पुत्रों ने कम्पनी का ऑटोमोबाइल, बीमा, टायर आदि क्षेत्रों में विस्तार किया.
4. PVR
प्रिय एक्जीबिटर्स प्राइवेट लिमिटेड और आस्ट्रेलिया की विलेज रोड शो लिमिटेड के संयुक्त उधम से वर्ष 1995 में PVR की स्थापना हुयी और 1977 में भारत का पहला मल्टीप्लेक्स नई दिल्ली में खोला गया. बाद में विलेज रोड शो द्वारा हिस्सेदारी वापिस लेने पर इसका नाम PVR लिमिटेड कर दिया गया.
5. MRF
वर्ष 1946 में MRF के संस्थापक के.ऍम.मापिल्लई ने गुब्बारे निर्माण का छोटा सा कारखाना मद्रास में खोला. 1952 में कम्पनी ने रबर उत्पादन करना शुरू किया. 1967 में MRF अमेरिका को टायर निर्यात करने वाली पहली भारतीय कम्पनी बनी. यह एकमात्र भारतीय कम्पनी है जो लड़ाकू विमान सुखोई 30 MKI के टायर बनाती है.
1. MDH
MDH के हर विज्ञापन में मौजूद महाशय धर्मपाल गुलाटी इसके संस्थापक है. अविभाजित भारत के सियालकोट में उनके पिता चुन्नीलाल “महाशिया दी हट्टी” नाम से मसालों का क्यापार करते थे. विभाजन के बाद धर्मपाल दिल्ली आ गए. कुछ समय बाद उन्होंने लकड़ी का बक्सा (हट्टी) खरीदा और उसी नाम से अपने पारिवारिक व्यापार की नई नींव रखी.
2. ITC
24 अगस्त 1910 में इम्पीरियल टोबैको कम्पनी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड के नाम से ITC की शुरुआत हुयी. शुरुआत के 6 दशक तक कम्पनी का व्यापार तम्बाकू पर केन्द्रित रहा. 1970 में नाम बदलकर इंडिया टौबेको कम्पनी और 1974 में I.T.C लिमिटेड कर दिया गया. 2001 में नाम के बीच से बिन्दुओं को हटाकर केवल ITC लिमिटेड कर दिया गया.
3. TVS
संस्थापक टीवी सुन्दरम आयंगर के नाम पर कम्पनी का नामकरण TVC किया गया था. वर्ष 1911 में दिल्ली में उन्होंजे टीवी सुन्दरम आयंगर एंड संस के नाम से बस सेवा शुरू की थी. 1955 में उनके देहांत के बाद उनके पुत्रों ने कम्पनी का ऑटोमोबाइल, बीमा, टायर आदि क्षेत्रों में विस्तार किया.
4. PVR
प्रिय एक्जीबिटर्स प्राइवेट लिमिटेड और आस्ट्रेलिया की विलेज रोड शो लिमिटेड के संयुक्त उधम से वर्ष 1995 में PVR की स्थापना हुयी और 1977 में भारत का पहला मल्टीप्लेक्स नई दिल्ली में खोला गया. बाद में विलेज रोड शो द्वारा हिस्सेदारी वापिस लेने पर इसका नाम PVR लिमिटेड कर दिया गया.
5. MRF
वर्ष 1946 में MRF के संस्थापक के.ऍम.मापिल्लई ने गुब्बारे निर्माण का छोटा सा कारखाना मद्रास में खोला. 1952 में कम्पनी ने रबर उत्पादन करना शुरू किया. 1967 में MRF अमेरिका को टायर निर्यात करने वाली पहली भारतीय कम्पनी बनी. यह एकमात्र भारतीय कम्पनी है जो लड़ाकू विमान सुखोई 30 MKI के टायर बनाती है.

No comments:
Post a Comment