एंग्जाइटी डिसआर्डर क्या है, जानिये इसके लक्षण और बचाव के उपाय - Hindi News

Latest

loading...

Tuesday, 22 May 2018

एंग्जाइटी डिसआर्डर क्या है, जानिये इसके लक्षण और बचाव के उपाय

किसी भी समस्या पर घबराकर त्वरीत प्रतिक्रिया देना खतरा भांपने और उससे बचने में तो मदद कर सकता है लेकिन सामान्य से अधिक चिंता करना एंग्जाइटी डिसआर्डर के लक्षण है. एंग्जाइटी डिसआर्डर सबसे सामान्य डिसआर्डर है जो अमूमन 30% युवाओं की जिंदगी में किसी ना किसी समय प्रभावित करता है. एंग्जाइटी एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन इसकी अधिकता के कई दुष्परिणाम होते है. आईये जानते है एंग्जाइटी डिसआर्डर के लक्षण क्या है और इससे कैसे बचें. 


एंग्जाइटी डिसआर्डर के लक्षण

1. हर समय घबराहट होना
हर समय पैसा, Health, काम के बारे में डर और घबराहट महसूस होती है तो यह सामान्य एंग्जाइटी डिसआर्डर के लक्षण है. अकारण ही गड़बड़ की आशंका होना, सोचते-सोचते छोटी सी बात के सबसे बुरे परिणाम की कल्पना कर लेना इस श्रेणी में आते है. शारीरिक तौर पर दिल की धड़कन बढ़ना, पसीना आना, हाथ-पैर कांपना, चक्कर आना आदि इसके लक्षण हो सकते है.

2. सबसे सामने आने का डर


जब व्यक्ति को सार्वजनिक स्थानों पर सबके सामने आने से घबराहट महसूस होने लगे, तो इसे सोशल एंग्जाइटी डिसआर्डर कहते है. यदि वे अपने कमरे में अकेले हो तो घबराहट महसूस नहीं होगी लेकिन बाहर निकलने के नाम से ही उनके हाथ-पाँव फूलने लगते है.

3. पैनिक डिसआर्डर

घबराहट के साथ दिल की धड़कन तेज होना, छाती में दर्द या पसीना आने लगना या किसी जगह ऐसा महसूस होने लगे की यहां से निकल जाए नहीं तो जान जा सकती है. ऐसे पैनिक अटैक आने लगते है.

4. डर का हावी होना

कोकरोच, चूहे, ऊंचाई से डर फोबिया कहलाता है. एगोराफोबिया एक ऐसे स्थिति है जब किसी को भीड़ में डर लगने लगता है. यह लोग भीड़ वाली जगह पर जाने से कतराते है क्योंकि उन्हें लगता है की कुछ हो गया तो वे उस जगह से बाहर नहीं निकल पायेंगे.

एंग्जाइटी डिसआर्डर से कैसे बचें

1. काग्नैटीव बिहेवियर थैरेपी

सभी डिसऑर्डर्स के लिए यह थैरेपी समान है. इस तरह की थैरेपी में मन:स्थिति और ऐसी चीजों के बारे में बताया जाता है जो आपको करना चाहिए. जैसे ध्यान लगाना, पढना, अपने विचारों और व्यवहार में बदलाव लाना आदि. इसमें 12 से 16 हफ्तों का समय भी लग सकता है.

2. एक्सपोजर थैरेपी


आस्पान योजनाबद्ध तरीके से ऐसी चीजों को रखा जाता है जिससे व्यक्ति को डर लगता है. फंडा सरल है, जितना आप डर का सामना करेंगे उतना डर कम होता जायेगा. अगर सोशल एंग्जाइटी डिसआर्डर है तो किसी रेस्टोरेंट या स्टेडियम में ले जाए. जिसे कीड़े से डर हो पहले उसका फोटो दिखाए और फिर असल में उसे सामने लाया जाये.

3. एक्सेप्टेंस एंड कमिटमेंट थैरेपी

इस थैरेपी में घबराहट पैदा करने वाले नकारात्मक विचारों के बारे में अवगत होना और उन्हें स्वीकार करने के बारे में सिखाया जाता है. परेशान करने वाले विचारों पर नए और सकारात्मक दृष्टिकोण में सोचने लगते है और जीवन को प्रभावित करने वाली किसी भी चीज को बदलने के लिए प्रतिबद्ध रहते है.

No comments:

Post a Comment